शिखर संवाद ब्यूरो बदायूं। सत्ता के नशे और वर्दी के अहंकार ने जब एक नेत्रहीन की बेबसी का मजाक उड़ाया, तो खाकी पर कालिख पुत गई। बदायूं की बिसौली कोतवाली में न्याय की गुहार लगाने आए एक दिव्यांग से बदसलूकी का वीडियो वायरल होते ही विभाग में हड़कंप मच गया। एसएसपी अंकिता शर्मा के कड़े रुख के बाद कोतवाल राजेंद्र सिंह पुंडीर और दरोगा भूपेंद्र यादव को निलंबित कर दिया गया। अब क्राइम ब्रांच से आए कमलेश मिश्रा को बिसौली की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह मामला महज एक निलंबन का नहीं, बल्कि पुलिस की संवेदनशीलता पर लगे गहरे दाग का है। बीते दिनों जब एक नेत्रहीन प्रार्थी अपनी फरियाद लेकर कोतवाली पहुंचा, तो उसे क्या पता था कि रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे। वायरल वीडियो में साफ दिखा कि निरीक्षक राजेंद्र सिंह पुंडीर अपना आपा खो बैठे और मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं। गालियों की बौछार और धक्का-मुक्की के बीच उस बेबस प्रार्थी को कार्यालय से बाहर खदेड़ दिया गया। वीडियो के सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलते ही बदायूं पुलिस सवालिया निशान लगने शुरू हो गए थे। एसएसपी अंकिता शर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुंडीर और सब-इंस्पेक्टर भूपेंद्र यादव को निलंबित कर जांच सीओ बिसौली सुनील कुमार को सौंप दी। शासन के इस कड़े संदेश के बाद अब कमलेश मिश्रा ने बिसौली कोतवाल का पदभार संभाल लिया है। क्राइम ब्रांच से आए मिश्रा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उस भरोसे को बहाल करने की है, जिसे उनके पूर्ववर्ती ने तार-तार कर दिया। क्या नया नेतृत्व बिसौली कोतवाली में मित्र पुलिस की छवि वापस ला पाएगा? या फिर कुर्सी बदलते ही रसूख का वही पुराना खेल जारी रहेगा? फिलहाल, जनता की नजरें नए कोतवाल की कार्यशैली पर टिकी हैं।

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